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Thursday, February 21, 2008

बदन पे सितारे लपेटे हुए......

दोस्तो,

आपने मेरी ग्रामोफोन गाथा को पसंद किया और इसका पहला भाग भी आपने देखा. आप सभी का शुक्रिया.

हमारे कई संगीतप्रेमी मित्रों ने सलाह दी कि इस मजेदार गाथा को आगे भी जारी रखा जाए. आप सबों का अनुरोध मैं कैसे ठुकरा सकता हूँ. वैसे भी यूनुस भाई ने अपने विविध भारती के ख़जाने से मेरे पोस्ट के लिए रेकॉर्ड्स की दुर्लभ तस्वीरें भेजी हैं. आप सबों के लिए इस गाथा का अगला और मनोरंजक भाग भी जल्द ही लेकर आऊँगा.

पर आज थोड़ा सा विषयांतर ....

आज पहली बार आपका ये दोस्त अपनी पोस्ट पर यू ट्यूब का विडियो लेकर हाजिर हुआ है. वैसे मैं गानों को देखने से ज्यादा सुनना पसंद करता हूँ पर आज जिस विडियो क्लिप को मैं आपके लिए लेकर आया हूँ वो सचमुच बेजोड़ है. हुआ यूँ कि मैंने अपने पीसी के ऑपरेटिंग सिस्टम विन्डोज़ XP प्रोफेशनल के लुक को बिल्कुल विन्डोज़ विस्टा की तरह कर दिया है और उसी सिलसिले में नेट पर कुछ खोजबीन कर रहा था तो मुझे ये विडियो क्लिप मिली. तो दिमाग में एक बात आयी कि क्यूं न एक पोस्ट ही लिख दी जाए. तो लीजिये हाजिर है....

फ़िल्म " प्रिंस " सन् 1969  में आयी थी और इसके मुख्य कलाकार थे शम्मी कपूर साहब, वैजयंतीमाला जी, अजीत साहब और हेलन जी. यह फ़िल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही थी. फ़िल्म में संगीत शंकर-जयकिशन जी का था. शम्मी कपूर साहब की अन्य फिल्मों की तरह ही इस फ़िल्म में भी उनके लिए पार्श्व गायन किया था मोहम्मद रफी साहब ने.

आज मैं आपके लिए इसी फ़िल्म का एक बेहतरीन गीत लेकर हाजिर हुआ हूँ. ये गाना क्या है साहब, पूरे बदन को थिरका देने का पूरा इंतजाम है. वैसे भी जिस गाने में शम्मी कपूर साहब हों और वो गाना पूरे शरीर को मरोड़ कर ना रख दे ऐसा कभी कभी ही होता है.


ज़रा शुरुआत देखिये...तेज ऑर्केस्ट्रा के बीच वैजयंतीमाला जी चमकदार साड़ी में तेज कदमों से चलती हुई आती हैं और शम्मी साहब के अनुरोध को ठुकरा कर अजीत जी के साथ डांस करने लगती हैं. तभी रभी साहब की झूमती हुई मस्ती भरी आवाज़ फिजा में तैरने लगती है और शुरू होती है शम्मी साहब की वो यूनिक अदाएं.
अदाएं जारी रहती हैं, नायिका नायक के साथ हो लेती हैं.. और बेचारे अजीत साहब देखते रह जाते है..
आइये देखें इसी गाने को यू ट्यूब पर.

                          


आपने शम्मी कपूर साहब की मस्ती देखी, वैजयंतीमाला जी का हुस्न देखा, अजीत साहब की बेचारगी देखी; आइये अब तस्वीर का दूसरा और मनोरंजक रुख देखें.


मोहम्मद रफ़ी साहब के एक लाइव कंसर्ट की विडियो क्लिप जिसमें रफ़ी साहब ने इसी गाने को जनता के सामने गाया है. बैकड्रॉप में अकॉर्डियन और सेक्सोफोन का जबरदस्त साथ. गायकी में वही मस्ती, वही चुलबुलापन, पर आप देखें... क्या कुछ नया लगा? कुछ मस्ती छायी?


आइये जब पूरी दुनिया ही बसंत के खुमार में डूबी है तो न रफ़ी साहब पीछे रहे हैं न हम रहेंगे....

 

                           

 

कहिये कैसी रही...........

5 comments:

annapurna said...

बहुत खूब !

शम्मी कपूर, रफ़ी और शंकर-जयकिशन की टीम लाजवाब है।

हो सकें तो इसी टीम के फ़िल्म लाटसाहब के गाने प्रस्तुत कीजिए।

anitakumar said...

बहुत बड़िया अजीत

Harshad Jangla said...

Shree Ajitsahab
I am visiting yr blog first time which I found from Radiovani.
Very interesting, very clear and very enjoyable. Thanx.
-Harshad Jangla
Atlanta, USA

Anonymous said...

मजेदार गीत और मस्त वीडियो.

रंजना [रंजू भाटिया] said...

बेहतरीन ...