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Sunday, June 07, 2009

पूर्वांचल के लोकगीत और एक सुर संग्राम

अपने प्रदेश की भाषा किसे अच्छी नहीं लगती और खास कर जब वो अंतर्राष्ट्रीय ख्याति नाम की हो। भोजपुरी के लिए भी कुछ ऐसा ही है कुछ हम पूर्वांचल वालों के दिलों में.
अगर बिहार के अलग अलग क्षेत्रों की बात करें तो वैसे मैं अंगिका बोली वाले अंग क्षेत्र से आता हूँ।
अगर हम पूर्वांचल के लोक गीतों की चर्चा करें तो हमारी अच्छी खासी समृद्ध परम्परा रही है । पर आज कल हम विभिन्न मीडिया के माध्यमों में लोकगीत सुनते हैं उनमे से कुछ ही उस परम्परा को आगे बढाते हुए मालूम होते हैं.
आज लोकगीतों की चर्चा करने के पीछे मेरा दो मकसद है। पहला तो ये की आजकल मैं अपने गाँवया कहें छोटे शहर तारापुर में रह रहा हूँ और हमेशा अलग अलग मौकों पर गाये जाने वाले गीतों से रूबरू होता रहता हूँ या तो सीधे ग्रामीणों के मुख से या स्थानीय रेडियो चैनल को सुनकर.
मैं आशा करता हूँ कि जल्द ही मैं कुछ तोहफे आपके लिए लेकर आउंगा।
मेरा दूसरा मकसद कुछ स्वार्थी किस्म का है।
शायद आप लोगों में से कुछ को पता होगा कि भोजपुरी का एक नया चैनेल शुरू किया गया है - महुआ। इसी चैनल पर रियलिटी शो के पुराने खिलाडी गजेन्द्र सिंह ,जिनकी सा रे गा मा और क्लोज अप अन्ताक्षरी को सराहा गया, लेकर आये हैं लोकगीतों के इंडियन आइडल का प्रतिरूप " सुर संग्राम". इस कार्यक्रम का प्रसारण 5 जूनसे शुरू हो चुका है. सप्ताह में दो दिन शुक्र और शनि , के रात साढ़े आठ बजे से इसका प्रसारण शुरू होता है. इसका पुनर्प्रसारण दूसरे दिन 11 बजे दिन में होता है. इसके होस्ट हैं मनोज तिवारी, और जज हैं मालिनी अवस्थी और कल्पना.
कल के इसी प्रोग्राम में एक गायक की प्रस्तुति हुई ,नाम है आलोक कुमार और घर कजरा,बिहार। श्री ब्रह्मदेव पासवान , जो खुद एक प्रसिद्ध लोक गायक हैं, उनका छोटा बेटा और मेरे अभिन्न मित्र श्री अरविंद कुमार जी ,जो अभी सैनिक स्कूल ,तिलैया में संगीत शिक्षक हैं, का छोटा भाई, मतलब मेरा छोटा भाई.
आप उसे जरूर देखें और अपनी प्रतिक्रया दें।
अगर आप कल नहीं देख पाए तो आज दिन में 11 बजे देखना ना भूलें.

4 comments:

annapurna said...

bahut din baad aapaka chitthaa dekh kar achchhaa lagaa.

mahua ki janakari mere liye nai hai. yahaa shaayad baad main dikhane lage...

yunus said...

बढिया है । कम से कम आप दिखे थे । हम तो दूरदर्शन वाले 'गुमशुदा की तलाश' में आपकी तस्‍वीर देने वाले थे । अब फटाफट ऑडियो चढ़ाईये लोकगीतों का । और हां अन्‍नपूर्णा जी सुदूर दक्षिण में 'महुआ' दिखना मुश्किल है । आपको डिमान्‍ड करनी होगी । प्रोफेशनल डी टी एच वालों से एक्‍स्‍ट्रा पैक लेना होगा । जुगत भिड़ानी होगी ।

डॉ. अजीत कुमार said...

युनुस जी, कम से कम आपको और बाक़ी दोस्तों को पता तो चल गया कि ये बन्दा अभी तक है. गुमशुदा तलाश वाले नाहक ही परेशां होते. लोकगीत जल्द ही लेकर आऊंगा. अन्नपूर्णा जी, ये महुआ चैनल तो टाटा स्काई के पैकेज में उपलब्ध है.

annapurna said...

जानकारी के लिए शुक्रिया अजीत जी !

युनूस जी, आप तो न, लोकगीतों के बारे में कुछ बोलिए ही मत। बहुत नाराज़ है हम आपसे। दुनिया भर के गाने सुनवाते है आप रेडियोवाणी पर, लेकिन वो एकलौता ढोलक का गीत (हैदराबादी लोकगीत) जो बाज़ार फ़िल्म में है पैमिला चोपड़ा और साथियों की आवाज़ों में, उसे सुनवाने का कभी ख़्याल नहीं आया आपको…